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Showing posts from June, 2021

ट्रेडिंग अकाउंट और डीमैट अकाउंट को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1 पहले शेयर मार्केट में कंपनियों के शेयरों को खरीदने के लिए बोली लगाई जाती थी लेकिन अब यह काम कंप्यूटर के माध्यम से किया जाता है।     2 शेयर मार्केट में शेयरों की ऑनलाइन खरीद-फरोख्त के लिए और उन शेयरों को रखने के लिए आपको ट्रेडिंग अकाउंट और डीमैट अकाउंट की जरूरत पड़ती है।      3 डीमैट अकाउंट का पूरा नाम डिमैटेरियलाइज्ड अकाउंट होता है।     4 डीमैट अकाउंट में सिर्फ डिजिटल शेयरों को रखा जाता हैं जबकि ट्रेडिंग अकाउंट के द्वारा आप आईपीओ, गोल्ड, म्यूच्यूअल फंड में भी निवेश कर सकते हैं।     5 यदि आप भी डीमैट अकाउंट खुलवाना चाहते हैं तो भारत में एनएसडीएल और सीडीएसएल यह सेवा प्रदान करती है।     6 डीमैट खाते में एनुअल मेंटिनेस चार्जेस (AMC) देने पड़ते हैं हालांकि ट्रेडिंग खाते वालों को ऐसी जरूरत नहीं होती। अगर आप डीमैट खाता खोलना चाहते हैं तो इसके लिए आपको भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) और नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) से मंजूरी लेनी जरूरी होती है। लेकिन ट्रेडिंग खाते को खोलने के लिए इसकी जरूरत नहीं होती।   ...

विज्ञापन में जनसंपर्क को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1 विज्ञापन का उद्देश्य होता है उत्पाद या सेवा की तरफ लोगों को आकर्षित करना तथा उन लोगों को ग्राहकों में तब्दील करना। जबकि जनसंपर्क का उद्देश्य होता है लोगों में उत्पादों को लेकर छवि निर्माण करना।     2  किसी भी जनसंचार माध्यम में विज्ञापन देने के लिए आपको निश्चित राशि की भुगतान करनी होती है जबकि जनसंपर्क में यह जरूरी नहीं होता।     3 विज्ञापन का सकारात्मक पक्ष यह है कि जिस उत्पाद का विज्ञापन बनाया गया है उसे बजट के हिसाब से विभिन्न माध्यमों में प्रदर्शित किया जाता है जबकि जनसंपर्क के जरिए एक संदेश या समाचार सिर्फ एक बार प्रकाशित किया जा सकता है।     4 विज्ञापन को पेड मीडिया के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह पैसे लेकर किसी कंपनी के विज्ञापन को प्रदर्शित करता है जबकि जनसम्पर्क को अर्जित मीडिया कहा जाता है क्योंकि यह स्वयं बिना किसी भुगतान के मीडिया अर्जित करता है।     5 विज्ञापन में क्रियात्मक भाषा शैली का प्रयोग किया जा सकता है जैसे उत्पाद को तुरंत खरीदें, आज ही संपर्क करें जबकि जनसंपर्क में बिना किसी टालमटोल और बकवास के साधारण भाषा का प...

डीएनए और आरएनए को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु :-

  1 डीएनए का अर्थ डीऑक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड होता है। वहीं आरएनए का अर्थ राइबोन्यूक्लिक एसिड होता है।     2 DNA जीवों के कोशिका के नाभिक और माइटोकॉन्ड्रिया में पाया जाता है।     3 साल 1869 में डीएनए की खोज फिड्रीक मीश्वर ने की थी।     4 RNA के दो प्रकार होते हैं जिनमें से एक है जेनेटिक और दूसरा नॉन-जेनेटिक। नॉन जेनेटिक RNA भी 3 प्रकार के होते हैं। जिनका नाम m-RNA, t-RNA, r-RNA होता है। वहीं डीएनए 2 के प्रकार होते है। जिनका नाम दक्षिणावर्ती डीएनए (B-D.N.A.) और वामावर्त डीएनए (Z-D.N.A.) है।     5 डीएनए में दो अणु श्रृंखलाएं होती है वही दूसरी ओर आरएनए में एक अणु श्रृंखला होती है।     6 डीएनए कोशिकाओं को उत्पन्न करने का काम करती है, साथ ही उनकी अनुवांशिक जानकारी को एकत्रित करती है। वहीं आरएनए प्रोटीन बनाने का काम करती है।     7 डीएनए में एडनिन, गवानिन, साइटोसिन व थाइमीन नामक 4 नाइट्रोजनी क्षार पाए जाते है। वही आरएनए में यह सब होते हैं परंतु इसमें थाइमीन क्षार नहीं होता उसकी जगह उसमें यूरेसिल नामक क्षार पाया जाता है।   ...

असायलम और शरणार्थियों को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं:-

 1 रिफ्यूजी वह व्यक्ति होता है जिसे अपने देश से युद्ध, उत्पीड़न, जातीय-धार्मिक हिंसा आदि कारणों की वजह से पलायन करना पड़ता है।      2 अपने देश से पलायन करने के बाद रिफ्यूजी किसी अन्य देश में रहने की अनुमति मांगता है। यह शरण ही असायलम कहलाती है।     3 एक व्यक्ति को शरणार्थी के रूप में मान्यता तब मिलती है जब उसे राजनीतिक कारण, आदिवासी हिंसा या धर्म-जाति के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ताहै।     4 इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने 5 मुद्दों जिनमें यौन या लिंग अभिविन्यास, महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न आदि आधारों पर किसी व्यक्ति को शरण देने का आग्रह किया था जिस पर अभी विचार किया जा रहा है।     5 साल 2018 के आंकड़ों के मुताबिक विश्व भर में शरणार्थियों की संख्या 1.3 करोड़ है।     6 विश्व में दो तिहाई शरणार्थी 5 देशों जिनमें सीरिया, सोमालिया, सूडान अफगानिस्तान और म्यांमार से आते हैं।     7 ज्यादातर शरणार्थी अपने देश से पलायन करने के बाद पड़ोसी देशों में आश्रय लेते हैं।      8 भारत में शरणार्थी तिब्...

मध्यप्रदेश को लेकर 10 महत्वपूर्ण बातें:-

 1  एक राज्य के रूप में मध्यप्रदेश की स्थापना 1 नवंबर 1956 को हुई थी।     2 मध्य प्रदेश भारत के ठीक बीचोबीच स्थित है। इसीलिए इसे इस नाम से जाना जाता है।     3 मध्यप्रदेश 1 नवंबर 2000 तक क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य था।     4 1 नवंबर 2000 में ही मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ को अलग कर एक नया राज्य बनाया गया।     5 मध्य प्रदेश की सीमाएं उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से मिलती है।     6 मध्यप्रदेश में खनिज संसाधन भरपूर हैं, यहां हीरे और तांबे के सबसे बड़े भंडार है।     7 मध्य प्रदेश में जिलों की संख्या 52 है। जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला इंदौर जबकि क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला छिंदवाड़ा है।      8 इस राज्य का क्षेत्रफल 308,245 वर्ग किलोमीटर है।     9 साल 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की कुल जनसंख्या 72,626,809 करोड़ है। जिसमें पुरुषों व महिलाओं की जनसंख्या संख्या क्रमश:  37,610,983  व  35,015,826 है।     10 मध्यप्रदेश के ...

अरुणाचल प्रदेश को लेकर 10 महत्वपूर्ण बातें:-

 1 Land of Dawn के नाम से प्रसिद्ध अरुणाचल प्रदेश में पूरे भारत में सबसे पहले सूर्योदय होता है।     2 ईटानगर अरुणाचल प्रदेश की राजधानी है। इसका नाम ईटा किले के नाम पर रखा गया है।     3 जब 1972 में अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित राज्य बनाया गया तभी इसका नाम अरुणाचल प्रदेश रखा गया था।     4 20 फरवरी 1987 को इसे भारतीय संघ में शामिल किया गया और यह भारत का 24वां राज्य बना।     5 अरुणाचल प्रदेश में करीब 30 भाषाएं बोली जाती हैं।     6 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की आबादी 13,83,727 है।     7 यहां चावल मुख्य भोजन है। इसके साथ ही यहां ज्यादातर बांस से बनी सब्जियां को बड़े चाव से खाया जाता है।     8 बुईया,छालो,वांचो,पासी,कोंगकी,पोनुंग,पोपीर आदि अरुणाचल प्रदेश के लोक नृत्य है।     9 अरुणाचल प्रदेश में जीव जंतुओं की काफी विविधता पाई जाती है यहां 200 से अधिक स्तनधारियों की प्रजाति मौजूद हैं।     10 अरुणाचल प्रदेश के तवांग शहर की मॉनेस्ट्री भारत की सबसे बड़ी मोनेस्ट्री है। यह 400 साल पुरानी है। पूरा आर्टिकल...

उत्तराखंड के 7 प्रसिद्ध मंदिर

 दोस्तों, उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है, उत्तराखंड वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग हुआ था, साल 2000 से साल 2006 तक उत्तराखंड को उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था बाद में उत्तरांचल का नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया। देहरादून उत्तराखंड की राजधानी है, उत्तराखंड को देवभूमि माना जाता है अतः यहाँ पर समस्त हिन्दू देवी देवताओं के मंदिर विराज मान है। देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र 7 मंदिर इस प्रकार हैं : -  1. केदारनाथ मंदिर 2. तुंगनाथ मंदिर 3. बद्रीनाथ मंदिर 4. नंदा देवी मंदिर 5. दूनागिरी मंदिर 6. नैना देवी मंदिर 7. मद्महेश्वर मंदिर उपरोक्त मंदिरों के बारे में सम्पूर्ण जानकरी के लिए पूरा लेख पढ़ें - उत्तराखंड के 7 प्रसिद्ध मंदिर

साक्षरता को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1 साक्षरता से तात्पर्य लोगों में अक्षर के ज्ञान से है, जो व्यक्ति लिखित सामग्री को पढ़ लिख सकता है वही साक्षर कहलाता है।     2 भारत में साक्षरता दर 77.7% है जिसमें शहरी इलाकों में साक्षरता 87.7% और ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता 73.5% है।     3 लोगों की निरक्षरता के पीछे कई कारण विद्यमान है जिनमें परिवार की मानसिकता, गरीबी, परिवारिक समर्थन की कमी तथा माता-पिता का निरक्षर होना आदि शामिल है।     4 साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए मुफ्त शिक्षा का प्रावधान जरूरी था जिसके बाद संविधान में शिक्षा के अधिकार के तहत इसे शामिल किया गया।      5 साक्षरता का प्रसार करने के लिए कई जागरूकता अभियानों को संचालित किया जाता है।      6 बच्चों में साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति, फीस माफ़ी करने जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन करना जरूरी है।      7 बच्चों में पढ़ने की आदत डालने के लिए प्रत्येक स्कूल में मुफ्त पुस्तके आवंटित करनी जरूरी है।     8 साक्षरता के महत्व को समझते हुए 1966 में यूनेस्को द्वारा अंतरराष्ट्रीय स...

विशिष्ट शिक्षा और समावेशी शिक्षा को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

  1 वे बच्चे जो अन्य सामान्य बच्चों से कुछ विशिष्ट विशेषताएं रखते हैं उन्हें विशेष छात्रों की श्रेणी में रखा जाता है।     2 विशिष्ट बच्चे अन्य सामान्य बच्चों के मुकाबले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक रूप से भिन्न होते हैं।     3 समाज में विशिष्ट बच्चों को भी सामान शिक्षा का अधिकार मिले इसीलिए विशिष्ट शिक्षा और समावेशी शिक्षा की संकल्पना सामने आई।     4 समावेशी शिक्षा में एक दिव्यांग छात्र को सामान्य छात्र के साथ पढ़ाया जाता है।     5 विशिष्ट शिक्षा में दिव्यांग छात्र की विशेष आवश्यकताओं को देखते हुए उन्हें पढ़ाया जाता है।     6 समावेशी शिक्षा का कहना है कि विशिष्ट शिक्षा से छात्रों में भेदभाव और हीन भावना का जन्म होता है।     7 विशिष्ट शिक्षा में दिव्यांग बालकों के लिए अलग स्कूल की व्यवस्था की जाती है। वही समावेशी शिक्षा में दिव्यांग बालकों को सामान्य बालकों के साथ पढ़ाया जाता है।     8 विशेष शिक्षा में दिव्यांग बालकों की विशेष आवश्यकताओं को देखते हुए सभी तरह की सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं। समावेशी शिक्षा में भी बाल...

एकीकृत शिक्षा और समावेशी शिक्षा को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1 एकीकृत शिक्षा और समावेशी शिक्षा, शिक्षा की ऐसी दो व्यवस्थाएं हैं जो विशिष्ट आवश्यकता वाले छात्रों और सामान्य छात्रों को एक साथ पढ़ने का मंच प्रदान करती है।     2 एकीकृत शिक्षा में सामान्य छात्रों के साथ, विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को पढ़ने का मौका दिया जाता है। लेकिन समावेशी शिक्षा में सामान्य स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले छात्रों के लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाई जाती  हैं।     3 समावेशी शिक्षा में विशिष्ट आवश्यकता वाले छात्रों को प्रशिक्षित शिक्षक शिक्षा देते हैं। लेकिन एक एकीकृत शिक्षा में पहले से मौजूद शिक्षकों द्वारा ही शिक्षा दी  जाती है।     4  समावेशी शिक्षा में अपंग और असक्षम छात्रों को प्रभावी शिक्षा दी जाती है लेकिन एकीकृत शिक्षा में ऐसा नहीं होता।     5  एकीकृत शिक्षा में स्कूलों में छात्रों के लिए बेहतर बनावट और वातावरण नहीं होता। लेकिन समावेशी शिक्षा में छात्रों के लिए बेहतर बनावट और वातावरण बनाया जाता है।     6 एकीकृत शिक्षा में कम लागत लगती है, समावेशी शिक्षा में उसके मुकाबले ज्यादा लागत लग...

मानव अधिकारों को लेकर 10 बिंदु निम्नलिखित हैं:-

 1 मानव अधिकार प्रत्येक व्यक्ति के जन्मजात अधिकार होते हैं जो उन्हें समान रूप से हासिल है।     2 मानव अधिकार किसी देश के कानूनी अधिकारों से अलग होते हैं क्योंकि इन अधिकारों का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय होता है।     3 मानव अधिकार, अधिकारों का समूह है जिसमें कई तरह के अधिकार शामिल है। इसमें सबसे प्रमुख है जीवन का अधिकार यानी कि प्रत्येक मनुष्य को जीवन जीने का अधिकार है।     4 मानव अधिकार प्रत्येक व्यक्ति को कई तरह की आज़ादी देता है जिनमें अभिव्यक्ति की आजादी, समानता का अधिकार, न्याय का अधिकार, दासता से मुक्ति का अधिकार, अवमानना का अधिकार आदि शामिल है।     5 मानव अधिकारों की सुरक्षा तथा उनके उल्लंघन की निगरानी रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा की घोषणा के बाद से अंतरराष्ट्रीय तौर पर मानव अधिकारों को अपनाया गया था।      6 10 दिसंबर 1950 में मानव अधिकार दिवस मनाने का फैसला लिया गया। तब से लेकर अब तक यह नियमित रूप 10 दिसंबर को मनाया जाता है।     7 28 सितंबर 1993 को भारत में मानव अधिकार कानून को अपनाया गया था।     8 इस...

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1 डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शिक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।     2 डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 में हुआ वे एक गरीब ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए।     3 उनके पिता सर्वपल्ली वी. रामास्वामी थे तथा उनकी माता सीताम्मा थी। उनके पिता एक जमीदार के अधीन काम किया करते थे।     4 डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चार भाई और एक बहन थी। परिवार में कुल 8 सदस्य होने की वजह से उनका भरण पोषण करना काफी मुश्किल कार्य था। इस वजह से उनका बचपन गरीबी में बिता।     5 उनका विवाह 16 वर्ष की आयु में सिवाकामु से हुआ था, सिवाकामु की उम्र उस दौरान 10 वर्ष थी।     6 उन्होंने अपने जीवन के 40 साल शिक्षण के क्षेत्र को दिए।     7 उनके पढ़ाने का अंदाज काफी अनोखा था वे अपने चुटीले अंदाज में पढ़ाते थे जिस वजह से छात्र उनकी पढ़ाई से मंत्रमुग्ध हो जाते थे।     8 डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1952 में पहले उपराष्ट्रपति तथा 1962 में भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने।   ...

मार्गदर्शन और परामर्श को लेकर 10 बिंदु निम्नलिखित है:-

 1 मार्गदर्शन का इस्तेमाल कठिनाइयों से उबरने के लिए किया जाता है जबकि परामर्श से मनोवैज्ञानिक समस्याओं से निपटने में मदद मिलती है।     2  मार्गदर्शन व्यापक बहिर्मुखी तथा प्रकृति में निवारक होता है जबकि परामर्श अंतर्मुखी और प्रकृति में उपचारात्मक होता है।      3 मार्गदर्शन के जरिए व्यक्ति को सभी विकल्पों में से सबसे अच्छा विकल्प चुनने में मदद की जाती है। वही परामर्श से व्यक्ति का परिपेक्ष्य बदलकर उसे स्वयं समस्या का समाधान निकालने की राह दिखाई जाती है।     4 ज्यादातर मार्गदर्शन शिक्षा, करियर तथा नौकरी से संबंधित मुद्दों पर किया जाता है। लेकिन परामर्श व्यक्तिगत, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक मुद्दों पर किया जाता है।     5   मार्गदर्शन करने वाला व्यक्ति किसी क्षेत्र विशेष का विशेषज्ञ हो सकता है लेकिन परामर्श देने वाला व्यक्ति कौशल, प्रशिक्षण तथा ट्रेनिंग हासिल करता है।     6 मार्गदर्शन एक बार में एक अथवा बड़ी जनसंख्या को दिया जा सकता है लेकिन परामर्श हमेशा व्यक्तिगत तौर पर दी जाती है।     7 मार्गदर्शन की प्रक्रि...

व्यापार और पेशे को लेकर मध्य 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1 व्यापार और पेशा दोनों ही आर्थिक गतिविधियां है। लेकिन एक तरफ व्यापार लाभ अर्जित करने के उद्देश्य से शुरू किया जाता है वहीं दूसरी पेशा सेवा की दृष्टि से किया जाता हैं।     2 व्यापार में वस्तु के उत्पादन, खरीद और बिक्री पर ध्यान दिया जाता है जबकि पेशे में ऐसा नहीं होता।      3 कोई भी व्यक्ति कुछ कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद व्यापार की स्थापना कर सकता है वहीं एक पेशेवर को अपना काम शुरू करने के लिए प्रमाण पत्र की जरूरत होती है।      4 व्यापार बिना किसी आचार संहिता के होता है तथा इसमें निर्णय लेने वाला व्यक्ति स्वतंत्र होता है जबकि पेशे में आचार संहिता का पालन करना जरूरी होता है।     5 व्यापार की शुरुआत करने के लिए व्यक्ति को किसी प्रशिक्षण और शैक्षिक योग्यता की जरूरत नहीं होती। जबकि पेशेवर को अध्ययन, प्रशिक्षण और विषय में विशेषज्ञता हासिल करनी जरूरी होती है।      6 एक व्यापार की प्रकृति से पता चलता है कि उसमें कितनी पूंजी निवेश की आवश्यकता है। पेशे में पूंजी की सीमित आवश्यकता होती है।      7 व्य...

एडवोकेट और लॉयर को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1 एडवोकेट वह व्यक्ति होता है जिसने कानून की पढ़ाई और प्रशिक्षण पूरा कर लिया हो और केस लड़ने में सक्षम हो। लॉयर वह व्यक्ति होता है जिसने अभी कानून की पढ़ाई पूरी न की हो तथा वह केस लड़ने में सक्षम न हो।     2 जो व्यक्ति एडवोकेट बनने के इच्छुक होते है उन्हें कानून की डिग्री के साथ-साथ ऑल इंडिया बार काउंसिल एसोसिएशन द्वारा आयोजित परीक्षा को पास करना जरूरी होता है।     3 ऑल इंडिया बार काउंसिल एसोसिएशन द्वारा आयोजित परीक्षा को क्लीयर करने के बाद एक सनद दिया जाता है। जो कि अदालतों में अभ्यास करने की पात्रता का मानदंड होता है।     4 हर लॉयर एक एडवोकेट नहीं होता परंतु हर एडवोकेट एक लॉयर होता है।     5 बार काउंसलिंग ऑफ इंडिया का काम होता है अधिवक्ताओं की गतिविधियों को नियंत्रित करना लेकिन यह वकीलों के आचरण को विनियमित नहीं करता।     6 लॉयर के पास सिर्फ कानून की डिग्री होती है लेकिन न्यायालय में केस का अनुभव नहीं होता जबकि अधिवक्ताओं के पास डिग्री के साथ न्यायालय में केस लड़ने अनुभव होता है।     7 वकील पूर्णकालिक रूप से शिक्षण कर सकते ...

सॉस और केचप के संदर्भ में 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

  1 केचप की उत्पत्ति 17वीं शताब्दी में हुई थी। तब केचप में मशरूम को प्राथमिक सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया गया।     2 1750 से 1850 के बीच तक केचप शब्द का प्रयोग मशरूम और अखरोट से बनी काली चटनी के लिए किया जाता था।     3 सॉस को नमकीन और मिठाई दोनों के साथ खा सकते है जबकि केचप को फास्टफूड जैसे फ्रेंच फ्राइस, बर्गर के साथ ही खाया जाता है।     4 सॉस की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द साल्सास से हुई है जिसका अर्थ होता है नमकीन। वही केचप शब्द की उत्पत्ति चीनी शब्द ‘कोईचिप’ से हुई है जिसका अर्थ होता है Brine of Fish।     5 सॉस में टमाटर, तेल, मीट और सब्जियों का प्रयोग किया जाता है। वही दूसरी ओर केचप में टमाटर, चीनी, सिरका जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है।     6 केचप अपनी प्रकृति में भी ठंडा होता है वही सॉस की प्रकृति गर्म होती है।      7 केचप को कभी भी गर्म नहीं किया जाता जबकि सॉस को किया जाता है।     8 हर सॉस केचप नहीं होता जबकि केचप खुद एक तरह का सॉस है।     9 सॉस, केचप के मुकाबले पतला होता है।  ...

ट्रस्ट और सोसायटी को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1. ट्रस्ट को भारतीय ट्रस्ट अधिनियम 1882 के अंतर्गत शासित किया जाता है। तो वही सोसाइटी को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है।         2. ट्रस्ट डीड, ट्रस्ट के पंजीकरण के लिए जरूरी होता है। वही मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन सोसायटी के लिए जरूरी होता है।         3. 15 से 20 दिन में ट्रस्ट का पंजीकरण किया जाता है। वही 20 से 25 दिन में सोसाइटी का पंजीकरण होता है।         4.  सोसाइटी की लागत ट्रस्ट से ज्यादा होती है।         5.  ट्रस्ट के गठन के लिए न्यूनतम 2 सदस्य की जरूरत होती है वही सोसाइटी के गठन के लिए न्यूनतम 7 सदस्य की आवश्यकता होती है।         6.  डिप्टी रजिस्ट्रार व चैरिटी कमिश्नर के पास ट्रस्ट को पंजीकृत करने की शक्ति होती है। वही सोसाइटी के रजिस्ट्रार के पास सोसायटी के रजिस्ट्रेशन की शक्ति होती है।         7.  ट्रस्ट पूरे देश में काम कर सकता है जबकि सोसाइटी जिस राज्य में पंजीकृत की जाती है उनका संचालन उसी राज्य में किया ज...

जीनोमिक्स और प्रोटियोमिक्स को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1 जीनोमिक्स में जीव की एकल कोशिका में पाया जाने वाला डीएनए का पूरा सेट जीनोम कहलाता है। जीनोम जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसमें जीन की संरचना, कार्य, जीन मैपिंग तथा विकास आदि का अध्ययन किया जाता है।     2 जीनोमिक्स 3 तरह के होते हैं जिनका नाम है संरचनात्मक जीनोमिक्स, कार्यात्मक जीनोमिक्स और तुलनात्मक जीनोमिक्स।      3 प्रोटियोमिक्स भी 3 तरह के होते हैं जिनका नाम है संरचनात्मक प्रोटियोमिक्स, कार्यात्मक प्रोटियोमिक्स और अभिव्यक्ति प्रोटियोमिक्स।     4 किसी कोशिका में मौजूद प्रोटीन को प्रोटियोम कहा जाता है जब इस प्रोटियोम का अध्ययन किया जाता है तो इसे प्रोटियोमिक्स के नाम से जाना जाता है।     5 प्रोटियोमिक्स के अध्ययन में कोशिका द्वारा उत्पादित प्रोटीन, प्रोटीन का निष्कर्षण, प्रोटीन डेटाबेस आदि का अध्ययन किया जाता है।     6 प्रोटियोमिक्स शब्द का सबसे पहले उपयोग मार्क विलिंक्स ने 1994 में किया।     7 साल 1926 में जीनोम शब्द का प्रयोग किया गया वहीं साल 1949 में डॉक्टर टॉम रॉड्रिक ने जीनोमिक्स शब्द का इस्तेमाल किया।   ...

एंटरप्रेन्योरशिप और सोशल एंटरप्रेन्योरशिप के मध्य 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1 एंटरप्रेन्योरशिप जिसे हिंदी में उद्यमिता के नाम से जाना जाता है, के तहत किसी व्यवसाय की शुरुआत नए विचार से की जाती है।     2 सामाजिक उद्यमिता, एंटरप्रेन्योरशिप का एक प्रकार है जिसमें ऐसे उत्पादों और सेवाओं का निर्माण किया जाता है जो सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करें।     3 एंटरप्रेन्योरशिप के कई महत्व होते हैं जैसे- रोजगार उत्पन्न करना, आर्थिक शक्ति का विकेंद्रीकरण, नए आविष्कारों को बढ़ावा देना तथा तीव्र आर्थिक विकास करना।     4  सामाजिक उद्यमिता की शुरुआत 1980 के दशक में मानी जाती है। सामाजिक उद्यमिता के भी कई महत्व होते हैं जिनमें सामाजिक समस्याओं को हल करना, देश का सामाजिक विकास, नौकरी सृजन तथा स्वयं ही नीति निर्धारण करना शामिल है।     5 एंटरप्रेन्योरशिप का लक्ष्य ऐसे उत्पादों और विचारों का सृजन करना है जिससे मुनाफा कमाया जा सके। जबकि सामाजिक एंटरप्रेन्योरशिप में ऐसे उत्पाद और सेवाओं का निर्माण किया जाता है जो सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हो।     6 एंटरप्रेन्योरशिप में मुख्यतः आय अर्जन को तवज्जो दी जाती है जबकि सामाज...

ड्रग्स और दवा में अंतर को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदु:-

 1. ड्रग शब्द ग्रीक भाषा के “फार्माकॉन” से निकला है। वहीं मेडिसिन शब्द लैटिन भाषा के “मेडिकस” से निकला है जिसका अर्थ होता है उपचार। 2. ड्रग एक रसायनिक पदार्थ है जो मनुष्य के शरीर को नियंत्रित करता है जिस वजह से आपको दर्द का एहसास नहीं होता। वहीं दवा किसी बीमारी व उसके लक्षण को कम करता है या ठीक करता है। 3. जैसा कि आप जानते है कि दवा एक निश्चित खुराक में ली जाती है। वहीं ड्रग्स की कोई निश्चित खुराक नहीं होती। 4. ड्रग्स लेने से हम बीमारी को कुछ समय के लिए भूल जाते है। लेकिन दवा बीमारी को जड़ से मिटाती है। 5. लगातार सेवन से ड्रग्स हमारे शरीर को नियंत्रित करने लग जाते हैं। और कुछ समय बाद हमें उनकी आदत पड़ जाती है। वहीं दवाओं का सेवन बीमारी के ठीक हो जाने तक किया है।  6. ड्रग्स मनुष्य के लिए हानिकारक होते है। वही दवाइयां मनुष्य के लिए उपकारी होतीं हैं। 7. सभी दवाइयां ड्रग्स होती है लेकिन सभी ड्रग्स दवाइयां नहीं होतीं। 8. दवाइयों को ड्रग्स से बनाया जाता है।जबकि ड्रग्स को पौधों, पशु, सूक्ष्मजीवों व खनिजों आदि से बनाया जाता है। 9. जब ड्रग्स की हमें इतनी आदत पड़ जाए कि उ...